🚨 User Generated Content पर बनेगी नई गाइडलाइन! सुप्रीम कोर्ट ने Centre से कहा – “Free Speech नहीं रोकेंगे, लेकिन ज़िम्मेदारी ज़रूरी”
नई दिल्ली — इंटरनेट पर कोई भी वीडियो डालो, पॉडकास्ट बना दो और बिना किसी जवाबदेही के लाखों लोगों तक पहुंच जाओ — इस चलन पर अब सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा कदम उठा लिया है। कोर्ट ने कहा है कि अब वक्त आ गया है कि यूज़र-जेनरेटेड कंटेंट (User Generated Content) के लिए नई, सख्त और आधुनिक गाइडलाइन्स बनाई जाएं।
कोर्ट ने केंद्र सरकार को 4 हफ्तों में ड्राफ्ट गाइडलाइन्स बनाने और पब्लिक से सुझाव लेने के बाद फाइनल नियम तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
⭐ कोर्ट ने क्या कहा?
शीर्ष अदालत की बेंच ने साफ कहा:
“बात कंटेंट रोकने की नहीं है… बात ज़िम्मेदारी तय करने की है।”
जजों ने बताया कि कोई भी व्यक्ति खुद का चैनल बना लेता है, आपत्तिजनक बातें कहता है और फिर कहता है — “मैं तो क्रिएटर हूं, मुझ पर कोई नियम नहीं लागू!”
कोर्ट का यह रुख एक पॉडकास्टर के मामले के बाद सामने आया, जिसमें उसने अपने शो में अश्लील और अपमानजनक भाषा इस्तेमाल की थी।
🔥 क्या-क्या बदल सकता है?
SC ने संकेत दिए कि नई गाइडलाइन्स में ये अहम पॉइंट्स शामिल हो सकते हैं:
✔️ 1. ऑनलाइन कंटेंट के लिए फिल्म जैसी Rating System
जैसे थिएटर में “U, U/A, A” रेटिंग होती है, वैसा ही सिस्टम अब डिजिटल कंटेंट पर भी लागू हो सकता है — YouTube, Instagram, Podcasts, Short Videos सब पर।
✔️ 2. Adult Content के लिए KYC
“A” कैटेगरी के कंटेंट के लिए आधार, पैन या डिजिटल KYC से Age Verification की व्यवस्था लागू की जा सकती है।
✔️ 3. हानिकारक कंटेंट पर “पहले ही रोक”
सिर्फ शिकायत आने के बाद हटाने की प्रक्रिया नहीं — बल्कि ऐसा सिस्टम बनाया जाए कि खतरनाक या आपत्तिजनक कंटेंट पब्लिश होने से पहले ही ब्लॉक हो जाए।
✔️ 4. Self-Regulation नहीं चलेगा
कोर्ट ने कहा – “खुद से बनी इंडस्ट्री बॉडी, यूट्यूबर्स का खुद का रेगुलेशन — यह काफी नहीं है।”
एक स्वतंत्र, ऑटोनोमस रेगुलेटर की जरूरत है।
🏛️ सरकार ने भी ड्राफ्ट में क्या-क्या सुझाया है?
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने कोर्ट में एक नोट जमा किया है जिसमें कहा गया है:
- डिजिटल न्यूज, OTT कंटेंट और यूज़र-जेनरेटेड कंटेंट (User Generated Content) — सभी के लिए अलग नियम
- अश्लीलता, हेट स्पीच, समुदायों का अपमान, फेक न्यूज और देश-विरोधी कंटेंट पर सख्ती
- Online platforms को ज्यादा मॉनिटरिंग और जवाबदेही करनी होगी
👀 इसका असर आम यूज़र और क्रिएटर्स पर?
- यूट्यूब/पॉडकास्ट क्रिएटर्स को अब सख्त नियम मानने होंगे — बिना सोचे-समझे कुछ भी बोल देना मुश्किल होगा
- Platforms को अपने सिस्टम में कंटेंट-फिल्टरिंग और मॉडरेशन को और मजबूत बनाना पड़ेगा
- बच्चों और टीनएजर्स को अश्लील/खतरनाक कंटेंट से अधिक सुरक्षा मिलेगी
- फेक न्यूज और अपमानजनक कंटेंट पर कड़ा प्रहार होगा
💬 कोर्ट की बड़ी बात: “हम आज़ादी नहीं काट रहे”
सुप्रीम कोर्ट ने आखिर में एक ज़रूरी बात कही:
“हमारा उद्देश्य Free Speech रोकना नहीं है।
लेकिन जब लाखों लोग आपको सुनते हैं, तो ज़िम्मेदारी भी उतनी ही बड़ी होती है।”
🔚 Bottom Line
भारत में डिजिटल कंटेंट का बूम है — और इसके साथ बढ़ रहा है बेकाबू कंटेंट। सुप्रीम कोर्ट का यह कदम ऑनलाइन दुनिया में अधिक सुरक्षा, जवाबदेही और पारदर्शिता लाने की दिशा में एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है।
अब नज़र इस बात पर है कि सरकार ✍️ अगली 4 हफ्तों में कैसी गाइडलाइन्स लेकर आती है।
📰 Key References
- Supreme Court seeks new rules on user-generated content — Hindustan Times Hindustan Times
- SC bats for autonomous body to regulate social media content — Economic Times The Economic Times
- Supreme Court suggests tougher rules on online content, Aadhaar age-checks for adult content — The Indian Express The Indian Express
- SC: Need to pre-screen social media content — The Times of India The Times of India
- Web content watchdog soon? SC says “Somebody has to be accountable” — NDTV www.ndtv.com
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